काश में ‘कल’ होता, ‘आज’ से कहीं दूर मेरा भी एक पल होता,
मेरे करीब ना मेरा धर्म, ना लोग, ना जश्न होता,
आज से दूर, सत्य का सोम पिये, मेरा हर कदम रक्स होता,
आज की सोच से मुक्त, नयी स्याही से नया ख़त लिख रहा होता,
काश में ‘कल’ होता… काश में ‘कल’ होता…
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