यह क्या हो रिया है (Yeh kya ho riya hai)

15 Feb

आँखों ही आँखों में इशारा हो रिया है,

बेठे ठाले गर्दन पे छाला हो रिया है|

कोई रोग नहीं, यह मोब्बत है,

बिन लोगों के ही तमाशा हो रिया है||

क्या लपक चाहत है,

हर छोटे पन्ने का लिफाफा हो रिया है|

हर घंटे फ़ोन टिन टीना रहा है,

यूँ ही बजेट में बढ़ावा हो रिया है||

घर के हर दर्रे में फोटो  है उनकी,

तो ही मन में शिकारा तिर रिया है|

बिन बारिश ही भीगे पढ़े हुए है हम तो,

पानी को बचाने पर ज़माना चल रिया है||

उनकी याद में धूं धूं करता है जिया,

एक हफ्ते से उनका दिल हम से किनारा कर रिया है|

ऐसा रुख भी क्या इस तकदीर का,

बिन उनके ही चार साल से फ़साना चल रिया है||

कोशिश तो दर ब दर भटकने की ना थी,

पर सालों से उनके घर अपना एक ठिकाना चल रिया है|

उनकी अम्मी हमें बेटा तो समझने लग गयी है,

उनका शायाद भाई जान बनाने का इरादा चल रिया है||

आखरी बार ही समझ लो,

दरख्वास्त का बहाना बन रिया है,

यार एक बार तो मिल लो अलग से,

दिल पर खुद को बयां करने का प्रेशर दुबारा होरिया है||

One Response to “यह क्या हो रिया है (Yeh kya ho riya hai)”

  1. Kriti May 24, 2010 at 6:41 pm #

    lagta hai tumko pakke se bhopaliya ho riya hai
    chaho na chaho asar ho riye haii
    is poem pe aapke public khushi se ro riya hai😀
    good one

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