Tag Archives: Poetry

Colors

21 Mar

दर्द कोई निचोडूं तो रंग होगा क्या?
लाल तो मेरे लहू का रंग है,
मेरे स्वप्न का रंग होगा क्या?
पीला तो इस माटी का रंग है,
मेरे पसीने का रंग होगा क्या?
नीला तो असमान ने ओढ़ रखा है,
मेरे अरमानो का रंग होगा क्या?
काली तो यह घटाएं है,
इस उद्वेलित मन का भला रंग होगा क्या?
तुम संग होते तो बताते,
तुम संग होते तो साथ रंग मिलाते,
तुम नहीं हो, तो क्या पता,
दर्द कोई निचोडूं तो रंग होगा क्या?

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The Tong (Chimta)

19 Mar

क्या क्यूँ और कैसे के फेर में बैठा, एक चिमटा देखा,
सोच विचार करे वोह क्या-क्या, मैंने उसको रोते देखा।
क्या रिश्ता उसका रोटी से, ऐसा उसको कहते देखा।
क्यूँ जलता है वोह अग्नि पे, मैंने उसको भय करते देखा।
कैसे वोह इस दर्द से छूटे, मंथन करते उसको देखा।
क्या क्यूँ और कैसे के फेर में बैठा, एक चिमटा देखा।

After having written these lines, it is indeed very tough to pin point to the inspiration behind these lines. I was sitting with my eyes closed, and these lines just came to me, probably because of hunger. But, indeed the chimta, isnt just a chimta, but in some aspects it is embodiment of human conditions in this poem. Now it is for others to judge, how successful I have been with this piece… and like always I will revisit this after few days.

Twelve lines in ten minutes

18 Mar

Realized that writing in short bursts can be quite good.

हर दिन हर पल जो बांधता है,
यादों में यादों को ताकता है,
फिर चुप ही चुप में भांपता है,
आपका, मेरा यह ठरकी दिल.

हर मुस्कान का मतलब रहा ढूंढता,
तकरार की पहेली रहा बुझता,
बावरा जो बावरा ना कह सका,
आपका, मेरा यह ठरकी दिल.

लफ्फाजी की गफलत में फस कर,
अलबेले जुमलो से सज कर,
आखिर कब तक दम भरेगा,
आपका, मेरा यह ठरकी दिल.

The tale of the tree

17 Mar

दूर से देखो तो हर दरख्त की एक कहानी है,
थोड़ी धुप में सिकी, थोड़ी बारिश में पकी,
कभी राहगीर की कही, तो कभी हवा संग बही,
कभी कोयल ने गाई, तो कभी झींगुरों ने सुनाई,
रोज नए किरदार है, रोज सजता दरबार है,
कभी समझ में आए तो कभी भुरभुरी सी याद रह जाये,
दूर किसी किनारे पर बनी, कभी अश्रुओं की धार से बंधी,
थोड़ी अपनी, थोड़ी परायी, थोड़ी नयी, थोड़ी पुरानी,
दूर से देखो तो हर दरख्त की अपनी ही एक कहानी है.

Random Lines – Romantic Poetry

17 Mar

रोशन है आशियाँ और आज आंख मेरी नम है,
वोह दूर भले बेठे है मुझसे, पर यह कायनात तो मेरे संग है.
कुछ रोष तो है, कुछ सांसें भी बेदम है,
काश काबू में हर पल होता मेरे, यहाँ तो बदल रही दुनिया हर क्षण है.
बूंद बूंद बहते हुए आंसुओ को भी अकेलापन सालता है,
यहाँ तो पूरी धार बह रही है, तीनो जहाँ हैं करीब मगर अकेले हम है.

I aim to be major rom-dram writer in India.

Random Lines

12 Mar

Decided to pen few lines before starting with some serious work. Well, these are definitely romantic, but they arent written for someone specific. This reminds me of a latest conversation with my friend.

My Friend: Man, you write poems, that is impressive.

Me: Nah! I dont think so, but yeah sometimes I feel I write good.

My Friend: Its good tool to impress girls.

Me: I write in Hindi…

My Friend: Ohh…is that bad?

Me: I guess so. I am still single.

Meanwhile, enjoy these lines.

वोह आंसुओं में भी सागर को ढूंड लेते है,
वोह हालात-ऐ-दिल को अपनी चुनर में समेट लेते है,
वोह तो खुदा है इस बेज़ार दिल के,
ठगी है यह उनकी की वोह हमसे बेहतर हमको समझ लेते है…

Rakt Pipaasu (Blood Thirsty)

13 Feb

धर्म की ढाल, अधर्म की धार,

निश्चय कर, अभिमानित हो के,

क्यूँ कर्म के रथ पे आरूढ़ तू हो चला ।

रण भी है, प्रण भी है,

हार के भय से मुक्त भले तू,

क्यूँ रक्त पिपासु तू हो चला ।।

I wish I were ‘tomorrow’

20 Jan

काश में ‘कल’ होता, ‘आज’ से कहीं दूर मेरा भी एक पल होता,
मेरे करीब ना मेरा धर्म, ना लोग, ना जश्न होता,
आज से दूर, सत्य का सोम पिये, मेरा हर कदम रक्स होता,
आज की सोच से मुक्त, नयी स्याही से नया ख़त लिख रहा होता,
काश में ‘कल’ होता… काश में ‘कल’ होता…

Color it all

26 Sep

है सुबह तो रंग दो, है रात तो उसे रंग दो,
है चुनर, है कफ़न, उन्हें भी रंग दो,
रंग बचे तो जमीन भी रंग दो,
जान रहे तो आस्मां रंग दो,
रंग देना, हो बस, तो हर इंसान को,
जब ख़तम हो जाये रंग तो संग बैठेंगे,
जब थकोगे तो संग सोचेंगे,
पता नहीं अब जात तो दिलों में काटें कैसे,
अब रंगे है सब तेरे मेरे ख्वाब से,
तो इस दुनिया को बाटें कैसे….

प्रेम दिवस की सौगात (Prem Divas ke Sougaat)

15 Feb

इस बार लव यू नहीं बोला तो क्या है,
पांच साल में अपने बच्चों का मामा बना लेना|
मुकद्दर को नुक्कड़ पे लातें पढ़ी तो क्या है,
गाली बकने को ही मिलने का बहाना बना लेना|

में किसी जनम में तोता बनू तो क्या होगा,
मैना बन संग मेरे गोते चार लगा देना|
बहेलिए ने पकड़ लिए तो क्या होगा,
उड़कर तुम अपना संसार बसा लेना||

दिन वलेंटाइन का है तो क्या है,
तुम किसी और दिन फ़ोन लगा देना|
आज भले ही में तुम्हे खुश ना कर सकूँ,
पहली तनख्वा पे ही मेरा त्यौहार बना देना||

तक्थ क्या है ताज क्या है,
फ़र्ज़ है बस तुम्हे अपना बनाना|
अगर राजा ना बन सका तो क्या है,
अपने पापा से कह के घर जमाई बना लेना|

चाहत को भी शर्म आ जाये अब तो,
इतना मोहब्बत पे इन्वेस्ट किया है|
अगर जले कभी तुम्हारे दिल में लोउ तो,
जितना लिया उधार, वोह चुका देना||