Summer Games

21 May

“Salamander, will you kiss me?”, what a despicable thought. It was the time I should have realized that I was over staying in the mud pond. Meanwhile the salamander was too lazy to reply, it was too hot, and like me the salamander also only thought of thinking and did nothing to reply my perversion. After all, it was hot, searing hot, the summer of Bloomington.

Famines

21 May

Famines are funny. People die out of hunger. Funny, because I am hungry most of the time if not all the time and I live on. In famine, if your stomach is hungry and you are unable to provide then you die. Whereas, if it is your brain, that is hungry, unprovided, in famine, it lives on. When in famine, poison is also nourishing. I have seen it, hordes of people nourished by poison. 

Colors

21 Mar

दर्द कोई निचोडूं तो रंग होगा क्या?
लाल तो मेरे लहू का रंग है,
मेरे स्वप्न का रंग होगा क्या?
पीला तो इस माटी का रंग है,
मेरे पसीने का रंग होगा क्या?
नीला तो असमान ने ओढ़ रखा है,
मेरे अरमानो का रंग होगा क्या?
काली तो यह घटाएं है,
इस उद्वेलित मन का भला रंग होगा क्या?
तुम संग होते तो बताते,
तुम संग होते तो साथ रंग मिलाते,
तुम नहीं हो, तो क्या पता,
दर्द कोई निचोडूं तो रंग होगा क्या?

Sookha Patta and some random lines

21 Mar

Sookhi shaakh ka sookha patta,
ab gira kee tab gira,
par woh jab gira, woh tab udaa,
kya khoob udaa, kya khoob udaa,
dur darakhtho se, tez hawaon ke sang,
be fikr, be khauf, bin tadbeer ke udaa,

sookhi shakh ka sookha patta,
kya khoob udaa, kya khoob udaa.

 

mein may mein khoya, to kabhi tere khwaab mein khoya,

itna khoya kee jab jagaa to tere ishq mein roya, yaa teri yaad mein roya

The Tong (Chimta)

19 Mar

क्या क्यूँ और कैसे के फेर में बैठा, एक चिमटा देखा,
सोच विचार करे वोह क्या-क्या, मैंने उसको रोते देखा।
क्या रिश्ता उसका रोटी से, ऐसा उसको कहते देखा।
क्यूँ जलता है वोह अग्नि पे, मैंने उसको भय करते देखा।
कैसे वोह इस दर्द से छूटे, मंथन करते उसको देखा।
क्या क्यूँ और कैसे के फेर में बैठा, एक चिमटा देखा।

After having written these lines, it is indeed very tough to pin point to the inspiration behind these lines. I was sitting with my eyes closed, and these lines just came to me, probably because of hunger. But, indeed the chimta, isnt just a chimta, but in some aspects it is embodiment of human conditions in this poem. Now it is for others to judge, how successful I have been with this piece… and like always I will revisit this after few days.

Are you awake now?

19 Mar

These lines are an attempt to capture state of dreaming and its transition to reality. Its for someone expecting a beautiful marriage life and then facing reality afterwards.

फिरदौसी क्या तुम जाग गए,
ख्वाब की चटाई पे लेटे थे,
बेठे थे आँख बिछाये तुम,
सोचे थे की सब मंगल होगा,
रोज प्यार का दंगल होगा,
पर आटे दाल के भाव बढे,
और रोज गटर में पाँव पढ़े,
तब नींद भंग तो होनी थी,
और प्रश्न खड़ा यह होना था,
फिरदौसी क्या तुम जाग गए…

My Conversations

18 Mar

Me #2: What do you want from life?
Me #1: Well, I can sing…
Me #2: No, I am asking what do you want…
Me #1: See, here is the thing, last time I posted a list, God sent me here on earth. 

Twelve lines in ten minutes

18 Mar

Realized that writing in short bursts can be quite good.

हर दिन हर पल जो बांधता है,
यादों में यादों को ताकता है,
फिर चुप ही चुप में भांपता है,
आपका, मेरा यह ठरकी दिल.

हर मुस्कान का मतलब रहा ढूंढता,
तकरार की पहेली रहा बुझता,
बावरा जो बावरा ना कह सका,
आपका, मेरा यह ठरकी दिल.

लफ्फाजी की गफलत में फस कर,
अलबेले जुमलो से सज कर,
आखिर कब तक दम भरेगा,
आपका, मेरा यह ठरकी दिल.

The tale of the tree

17 Mar

दूर से देखो तो हर दरख्त की एक कहानी है,
थोड़ी धुप में सिकी, थोड़ी बारिश में पकी,
कभी राहगीर की कही, तो कभी हवा संग बही,
कभी कोयल ने गाई, तो कभी झींगुरों ने सुनाई,
रोज नए किरदार है, रोज सजता दरबार है,
कभी समझ में आए तो कभी भुरभुरी सी याद रह जाये,
दूर किसी किनारे पर बनी, कभी अश्रुओं की धार से बंधी,
थोड़ी अपनी, थोड़ी परायी, थोड़ी नयी, थोड़ी पुरानी,
दूर से देखो तो हर दरख्त की अपनी ही एक कहानी है.

Random Lines – Romantic Poetry

17 Mar

रोशन है आशियाँ और आज आंख मेरी नम है,
वोह दूर भले बेठे है मुझसे, पर यह कायनात तो मेरे संग है.
कुछ रोष तो है, कुछ सांसें भी बेदम है,
काश काबू में हर पल होता मेरे, यहाँ तो बदल रही दुनिया हर क्षण है.
बूंद बूंद बहते हुए आंसुओ को भी अकेलापन सालता है,
यहाँ तो पूरी धार बह रही है, तीनो जहाँ हैं करीब मगर अकेले हम है.

I aim to be major rom-dram writer in India.

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